गोदान

गोदान

by प्रेमचंद

गोदान प्रेमचंद का ग्रामीण यथार्थवादी उपन्यास है, जिसका केंद्र पात्र निर्धन किसान होरी है। उसकी जीवन-भर की सबसे बड़ी अभिलाषा एक गाय पाने की है, जो भारतीय किसान के लिए समृद्धि और सम्मान का प्रतीक है। गरीबी, लगान, कर्ज़ और ज़मींदारी शोषण के बीच होरी और उसकी पत्नी धनिया संघर्षशील ईमानदार जीवन जीते हैं। उनकी गृहस्थी में लगातार अभाव, संतानों का पलना-मरना, महाजनों का अत्याचार और सामाजिक दबाव बना रहता है। होरी अपने सिद्धांतों, परिवार-प्रतिबद्धता और सामाजिक मर्यादाओं को निभाते-निभाते टूटता जाता है, पर मन में गाय रखने का स्वप्न पलता रहता है। भोला की गाय खरीदने की इच्छा भी इसी अभिलाषा का विस्तार है। दूसरी ओर, ज़मींदार राय साहब, पंचायत, पुरोहित, महाजन—सब मिलकर उस ग्रामीण व्यवस्था को रचते हैं जिसमें मेहनतकश किसान शोषण के चक्र से निकल नहीं पाता। अंततः होरी का जीवन किसान-त्रासदी और मानवीय संघर्ष का मार्मिक प्रतीक बन जाता है।
Published:2025
Genre:Young Adult Nonfiction
Language:Hindi

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